भारत से हमने क्या सीखे क्या है? | भारत से हम क्या सीखें क्लास 10?

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भारत से हमने क्या सीखे क्या है? | भारत से हम क्या सीखें क्लास 10?

पाठ-3 भारत से हम क्या सीखें (गोधूलि भाग-2 गधा खंड) सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर 2023 | भारत से हम क्या सिखे सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर 2023. दोस्तों, यहां आपको दसवीं कक्षा के हिंदी गोधुली भाग 2 बिहार बोर्ड के पाठ भारत से हम क्या सीखें के बारे में एक Subjective प्रश्न दिया गया है। जो मैट्रिक परीक्षा 2023 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। और यहाँ भारत से हम क्या सीखें वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर दिया गया है। जिसे आप आसानी से पढ़ सकते हैं।

प्रश्न 1. समस्त भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है। – लेखक ने ऐसा क्यों कहा है ?

उत्तर:- जब लेखक ने भारत की यात्रा की, तो उसने भारत को स्वर्ग के समान पाया। यहां के रीति-रिवाज, इतिहास, रहन-सहन, भाषा, साहित्य और पुरातत्व को देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। इसीलिए लेखक ने कहा है- “भारत सम्पूर्ण विश्व में सार्वभौमिक संपदा और प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण देश है।

प्रश्न 2. आज का भारत भी ऐसी अनेक समस्याओं से भरपूर है जिनका समाधान उन्नीसवीं सदी के हम यूरोपियन लोगों के लिए भी वांछनीय है सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक 'गोधूलि' भाग-2 के 'भारत से हम क्या सीखें' शीर्षक पाठ से उद्धृत है। इस पंक्ति में जर्मन विद्वान फ्रेडरिक मैक्समूलर ने भारतीय सिविल सर्विस में चयनित पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्हें भारत की समस्याओं का इनका समाधान खोजने की सलाह दी है।

लेखक का कहना है कि भारत एक विशाल देश है। विशेषताओं के साथ-साथ वहाँ ऐसी अनेक समस्याएँ हैं जो न सिर्फ उसे मथ रही हैं, अपितु उन्नीसवीं सदी के यूरोप के बहुत सारे देशों के सामने मुँह बाए खड़ी हैं। अत: भारतीयों की समस्याएँ हल करना जरूरी है ताकि उससे यूरोप के लोग भी लाभान्वित हों।

लेखक का तात्पर्य है कि मनुष्य चाहे जहाँ हो, सबकी समस्याएँ प्रायः एक जैसी होती हैं। अतः मिलजुलकर उनका समाधान ढूँढ़ना चाहिए।

प्रश्न 3. लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों ?

उत्तर:- लेखक की दृष्टि में सच्चा भारत गाँवों में देखा जा सकता है। क्योंकि भारत की अधिकांश जनसंख्या आज भी अपने सांस्कृतिक परिवेश में गांवों में निवास कर रही है।

प्रश्न 4.  यह एक ऐसा इतिहास है जो राज्यों के दुराचारों और अनेक जातियों की क्रूरताओं की अपेक्षा कहीं अधिक ज्ञातव्य और पठनीय है? सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक 'गोधूलि' भाग-2 में संकलित मैक्समूलर के संबोधनात्मक निबंध 'भारत से हम क्या सीखें' से उद्धृत है। 

इस संबोधन में मैक्समूलर ने संस्कृत भाषा और इतिहास के महत्त्व को रेखांकित किया है। मैक्समूलर संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने इसका गहन अध्ययन किया था। 

अपने निष्कर्षों को बताते हुए वे कहते हैं संस्कृत ग्रीक, लैटिन आदि से भी प्राचीन भाषा है और भाषाओं का इतिहास उस इतिहास से ज्यादा विश्वसनीय होता है, जिसमें राजाओं के छल-छद्म और आक्रान्ताओं की क्रूरताएँ अधिक उल्लिखित होती हैं। 

दरअसल, भाषाओं के इतिहास से जातियों का उत्थान-पतन का स्वाभाविक रूप सामने आ जाता है। मैक्समूलर इसे ही सच्चा इतिहास कहते हैं। इस पंक्ति में मैक्समूलर ने इतिहास की अपनी स्थापना को ठोस रूप से एवं सप्रमाण आधार प्रदान किया है। 

प्रश्न 5. भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों ?

उत्तर:- भारत को पहचानने वाली दृष्टि की आवश्यकता यूरोपीय लोगों के लिए वांछनीय है क्योंकि न केवल प्राचीन भारत बल्कि वर्तमान भारत भी कई समस्याओं को हल करने में सहायक है।

प्रश्न 6. लेखक ने नीति-कथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है? [18 C]

उत्तर:- नीति-कथाओं के क्षेत्र में भारतीय अवदान अप्रतिम है। यहाँ की अनेक कथाएँ पश्चिम में मिलती हैं। 'शेर की खाल में गधा' कहावत यूनान के दार्शनिक प्लेटो के 'क्रटिलस' में मिलती है। 

इसी प्रकार नेवले या चूहे की कथा का बदला रूप एफ्रोडाइट की रचना में मिलता है। उसने उसे इसे एक सुन्दरी के रूप में बदल दिया है। यह कथा संस्कृत की एक कथा से मिलती है। 

प्राचीन काल की भी अनेक दन्तकथाओं में आश्चर्यजनक समानता भारत और पश्चिम में विद्यमान है। मैक्समूलर ने अपने वक्तव्य में इनको रेखांकित किया है।

प्रश्न 7. लेखक ने किन विशेष क्षेत्रों में अभिरूचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है ?

उत्तर:- लेखक ने भूविज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, पुरातत्व, दिव्य विज्ञान, भाषा विज्ञान, इतिहास, कानून, साहित्य आदि में रुचि रखने वालों के लिए भारत के प्रत्यक्ष ज्ञान को आवश्यक बताया है।

प्रश्न 8. संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को प्रमुख लाभ क्या-क्या हुए?

उत्तर:-_संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को ज्ञात हुआ कि संस्कृत भी सार रूप से वही है जो ग्रीक, लैटिन या एंग्लो सेक्सन भाषाएँ हैं। 

साथ ही, अपने बारे में उनकी जो धारणा थी वह बदल गई। उन्हें ज्ञात हुआ कि कभी हिन्दू, ग्रीक, यूनानी आदि जातियाँ एक थीं जो कालान्तर में अलग-अलग हुई और विभिन्न स्थानों को अपना निवास बनाया।  इस ज्ञान से पाश्चात्य जगत् के विचार उदार बने और जिन्हें वे कभी बर्बर-असभ्य समझते थे, उन सब को गले लगाना सीखा। 

प्रश्न 9. लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और कयों ?

उत्तर:- लेखक वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित दुर्भाग्यपूर्ण घटना का वर्णन करता है, जिसमें उसे वाराणसी के पास 172 डेरी सोने के सिक्के मिले थे। ये सिक्के ईस्ट इंडिया कंपनी को इसलिए भेजे गए थे ताकि उन्हें दुर्लभ वस्तुओं में गिना जा सके। लेकिन कंपनी के निदेशकों ने इसे सामान्य सोने का सिक्का समझकर गला दिया। लेखक ने इस घटना का वर्णन इसलिए किया ताकि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना दोबारा न हो।

प्रश्न 10. भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है? स्पष्ट करें। पठित पाठ के आधार पर सिद्ध करें। 11C, 12 C, 16 A)

उत्तर:- भारत एक प्राचीन देश है। यहाँ आज भी ऐसी वस्तुओं के दर्शन हो सकते हैं, जो सिर्फ पुरातन विश्व में ही सुलभ हो सकती हैं। ऐसे स्थल और जीवन-शैली आप पाएँगे जो अन्यत्र नहीं मिलेंगे। 

साथ ही, यह अत्यंत बडा देश है, जहाँ तेजी से बदलाव आ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, कृषि, राजनीति प्रतिपल आगे बढ़ने के लिए कसमसा रही है। 

गाँवों में परिवर्तन दिखाई पड़ रहा है। सीखने या सिखाने योग्य कोई ऐसी बात नहीं जो यहाँ न मिले। अतएव, भारत अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है। 

प्रश्न 11. लेखक ने नीतिकथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है ?

उत्तर:- लेखक ने दंतकथाओं के क्षेत्र में भारत के योगदान को इस प्रकार रेखांकित किया कि समय-समय पर अनेक दंतकथाएं भारत से पश्चिम तक आती रही हैं। इन कथाओं से यूरोप में नवजीवन का संचार हुआ है।

प्रश्न 12. भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण लेखक ने क्या दिखाए हैं ?

उत्तर:- भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक सम्बन्धों के प्राचीन प्रमाणों को लेखक ने बाइबिल और शाहनामा में दर्शाया है।

प्रश्न 13. भारत की ग्राम पंचायतों को किस अर्थ में और किनके लिए लेखक ने महत्त्वपूर्ण बतलाया है ? स्पष्ट करें।

उत्तर:- लेखक मैक्स मूलर ने सरल राजनीतिक इकाइयों के निर्माण और विकास से संबंधित कानून के प्राचीन रूपों के महत्व को समझने के अर्थ में भारतीय ग्राम पंचायतों को राजनेताओं के लिए आवश्यक बताया है।

प्रश्न 14. संस्कृत और दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को प्रमुख लाभ क्या-क्या हुए ?

उत्तर:- संस्कृत तथा अन्य भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत को अनेक लाभ हुए। संस्कृत तथा अन्य भाषाओं के अध्ययन से संसार में एक पारिवारिक सम्बन्ध स्थापित हुआ है। हम पाश्चात्य लोगों ने यह जान लिया है कि मानव जीवन की यात्रा कहां से शुरू हुई। हमें आगे बढ़ने के लिए कौन से रास्ते अपनाने चाहिए और हमें कहां पहुंचना चाहिए? यह हमने भारत से सीखा है। भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पता चलता है कि भारत और पश्चिमी दुनिया का संबंध बहुत प्राचीन है।

प्रश्न 15. धर्मो की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है ?

उत्तर:- धर्म की दृष्टि से भारत का बहुत महत्व है। धर्म का वास्तविक उद्गम, उसके प्राकृतिक विकास का प्रत्यक्ष परिचय भारत में मिलता है। भारत ब्राह्मण धर्म, वैदिक धर्म, बौद्ध धर्म की जननी और पारसी धर्म की शरणस्थली है।

प्रश्न 16. भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है ? स्पष्ट करें।

उत्तर:- न केवल प्राचीन भारत में बल्कि आज के भारत में भी शोधकर्ता यहां शोध करते हैं, इसलिए उनकी समस्या कैसी भी हो और चाहे वह किसी भी विषय से जुड़ी हो, उसका समाधान यहां मिलता है। यह उपाय भविष्य के लिए भी उपयुक्त है। इस तरह भारत अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है।

प्रश्न 17. मैक्समूलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएँ और महत्त्व बतलायें हैं ?

उत्तर:- मैक्स मूलर ने अपने लेख में संस्कृत भाषा की अनेक विशेषताओं का उल्लेख किया है। पहली विशेषता - संस्कृत भाषा विश्व की सभी भाषाओं से प्राचीन है। दूसरी विशेषता यह है कि आज की संस्कृत में भी पुरातनता के तत्व विद्यमान हैं। तीसरी महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह भाषा अन्य भाषाओं को जानने का आधार है। अन्य भाषाओं से इसकी समानता की व्याख्या करते हुए लेखक कहता है कि संस्कृत की 'अग्नि' को लैटिन में 'इग्निस' और लिथुआनियाई में 'उग्निस' कहा जाता है। इसी तरह चूहे को संस्कृत में मुसाह, ग्रीक में मुस, लैटिन में मुस और पुरानी जर्मन में 'मूस' कहा जाता है।

प्रश्न 18. लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को किसकी तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है और क्यों ?

उत्तर:- मैक्स मूलर भारत में आने वाले नवागंतुकों को सर विलियम जोन्स की तरह सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं। क्योंकि सर विलियम जोन्स जैसा स्वप्नद्रष्टा ही यह समझ सकता है कि अपने सपनों को कैसे सच किया जाए और अपनी कल्पनाओं को हकीकत में कैसे बदला जाए।

प्रश्न 19. लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?

उत्तर:- लेखक भारतीय इतिहास को वास्तविक इतिहास मानता है क्योंकि भारतीय इतिहास में मानव इतिहास की बहुमूल्य जानकारी मिलती है। भारतीय इतिहास का एक अध्याय विश्व के किसी भी देश के इतिहास से अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 20. लेखक ने नया सिकंदर किसे कहा है? ऐसा कहना क्या उचित है? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- लेखक ने विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन, शोध और अनुसंधान करने वाले लोगों को नया सिकंदर कहा जो भारत आना चाहते हैं। ऐसा कहना उचित भी है क्योंकि आप सिकंदर की तरह आकर भारत देश से संबंध स्थापित कर सकते हैं।

प्रश्न 21. भारत के संबंध में मैक्समूलर के विचार अपने शब्दों में लिखें।
या, भारतीय सिविल सर्विस के पदाधिकारियों को मैक्समूलर ने क्या सलाह दी थी? 
या, 'भारत से हम क्या सीखें' निबंध की प्रमुख बातों का उल्लेख करें। 
या, 'भारत से हम क्या सीखें' पाठ का सारांश लिखिए।

उत्तर:- विशाल भारत संपत्ति और प्राकतिक सषमा की खान है। यहाँ नदियाँ हैं, सुरम्य घाटियाँ हैं। मानव मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का साक्षात्कार भी इसी देश ने किया है। प्लेटो और काण्ट से भी पहले यहाँ के लोगों ने अनेक समस्याओं के समाधान ढूँढ़ लिए थे।

दरअसल, सच्चा भारत शहरों में नहीं, गाँवों में बसता है। यहाँ सम्प्रति जो समस्याएँ हैं, वे उन्नीसवीं सदी के यूरोप की ही समस्याएँ हैं। अतः इनका समाधान होने से यूरोप भी लाभान्वित होगा।

ज्ञान-विज्ञान की प्रचुर सामग्री यहाँ मौजूद है, चाहे वह भू-विज्ञान हो, वनस्पति विज्ञान हो, जन्तु विज्ञान या नृवंश विद्या। कनिधम के अनुसार पुरातत्त्व की जानकारी के लिए तो यहाँ सामग्री-ही-सामग्री है। 

यहाँ की नीति-कथाएँ अनेक देशों में थोड़े परिवर्तन के साथ देखने को मिल जाएँगी। यहाँ की संस्कृत भाषा अनेक भाषाओं की अग्रजा है। 

संस्कृत के अनेक शब्द ग्रीक और अन्य भाषाओं में कुछ परिवर्तन के साथ मिलते हैं, जैसे संस्कृत की 'अग्नि' लैटिन की 'इग्निस' है। 

संस्कृत का 'मूष', ग्रीक में 'मूस', लैटिन और जर्मन है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि हिन्दू, ग्रीक और यूनानी जैसी जातियाँ कालान्तर में अलग-अलग जा बसीं।

संस्कृत के अध्ययन से बड़ी सहजता से मानव-मन की अतल गहराइयों में उतरा जा सकता है और उदारता तथा सहानुभूति जैसे भावों की प्रचुरता यहाँ देखी जा सकती है।

भारत वैदिक या ब्राह्मण धर्म की भूमि के साथ, बौद्ध और जैन धर्म की जन्मस्थली और पारसियों के जरथूष्ट्र धर्म की शरणस्थली भी है। प्रशासन की दृष्टि से यहाँ लोकतंत्र का आदि रूप ग्राम-पंचायत मिलता है।

दरअसल, भारत आज उस दहलीज पर खड़ा है जिसके पीछे समृद्ध अतीत और सुदूर भविष्य की अमित संभावनाएँ हैं। अतः वहाँ जाकर बहुत-कुछ जाना-पाया और सीखा जा सकता है।

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