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हमारा देश भारत पर निबंध | Essay on Our Country in Hindi

हमारा देश भारत पर निबंध | Essay on Our Country in Hindi Nibandh
हमारा देश भारत पर निबंध | Essay on Our Country in Hindi Nibandh


हमारा देश भारत

BM, 20A
"जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" 

भूमिका: अर्थात् माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। माता हमें जन्म देती है। अनेक कष्टों को सहकर हमारा लालन-पालन करती है। ठीक हमारा देश और इसकी मिट्टी भी हमारे लिए वैसा ही है। इस संसार में जितना भी देश है, सब अपने देश को अच्छा मानते हैं।

जगतगुरु के रूप में: विश्व में सभ्यता का विकास ठीक से हुआ भी नहीं था, तब हमारे देश में वेदों की रचनाएँ हो रही थी। उपनिषदों की रचना हुई थी। जिससे मानव समाज को नया दर्शन मिला था। तभी तो कहा गया है 

क्या कोई देश यहाँ से जो न जिया है?
सदुपदेश-पीयूष सभी ने यहाँ पिया है।

सियाराम शरण गुप्त की यह पंक्तियाँ गुरु के रूप में ज्ञान का अमृत पिलानेवाला यह देश विश्व को गणित, विज्ञान, आध्यात्म, चिकित्सा अर्थशास्त्र आदि की शिक्षा दिया। चाहे वह देश पश्चिम का हो चाहे अरब, यूनान, रोम चीन।

विश्व मानचित्र पर: यह वह देश है जहाँ देवता भी बार-बार जन्म लेकर धन्य हुए। यह वह पवित्र भूमि है जहाँ विश्व भर से यथा-मैगास्थनीज, ह्वेनसांग, फाह्यान आदि यात्री कष्टकर यात्राएँ करके पधारे। 

अनेक देश हमारे देश का ऋणी है। उत्तर में सर्वोच्च हिमालय इस देश की शोभा बढ़ा रहा है। दक्षिण में समुद्र इसका पैर पखारता है। 

हृदय-स्थली हरी-भरी धरती और मोतियों की माला की तरह मीठे पानी से भरी नदियाँ और अनेक तीर्थस्थल आदि से ही हमारा भारत महान है।

भारत भ्रमण विश्व भ्रमण के समान: प्रकृति का सारा सौंदर्य इस देश की सम्पत्ति है। केसर की क्यारियाँ भरा स्वर्ग-सा कश्मीर, ताजमहल आठवें आश्चर्य के रूप में। 

अजन्ता, एलोरा-गुफाएँ, कुरुक्षेत्र, अयोध्या, ब्रज, नालंदा, मथुरा, लखनऊ, दिल्ली आदि विविध स्मृतियाँ संजोए है। जिसे दर्शनार्थ दुनियाँ के कोने-कोने से शैलानी आ-आकर इस बात का साक्षी बनते हैं कि भारत भ्रमण विश्व भ्रमण के समान है।

भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण-विशेष नर का है।
एक देश का नहीं, शील यह भूमंडल का है। 

उपसंहार: गुलामी समाप्त होने के बाद हमारा भारत संसार का सबसे मजबूत लोकतंत्र बनकर उभरा, जिसकी आज सब देश प्रशंसा करते हैं। मंद गति से ही सही लेकिन दृढ़ता से विकासोन्मुख है। 

बाधाएँ आना प्रकृतिस्थ है। आतंकवादी घटनाएँ मानवता को शर्मसार कर जाती है। परन्तु विश्वास है कि मेरे इस महान देश की आजादी को कोई भी देश झपट नहीं सकता है। Essay on Our Country in Hindi Nibandh

इक्कीसवीं सदी का भारत 

भूमिका:- भारत को आजाद हुए लगभग पचास वर्ष हुए हैं। इन वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में आश्चर्यजनक विकास किया है। अंग्रेजों द्वारा दी गई दरिद्रता को हटाकर यह विकासशील देशों की पंक्ति में आकर खडा हो गया है। विभिन्न क्षेत्र में हमने आत्म निर्भरता प्राप्त कर ली है। इस आत्म-निर्भरता से हमारे सम्मान में बढ़ोतरी हुई है। 

परिवर्तित भारत:- परिवर्तन सृष्टि का नियम है। भारत की अनेक परिवर्तनों के दौरों से गुजरा है। स्वतंत्रता के समय आज के आश्चर्यजनक परिवर्तनों की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। 

यद्यपि गरीबी पर हमने पूर्णत: विजय नहीं पाई है तथापि आम आदमी के जीवन-स्तर में सुधार लाने में हम अवश्य रूल हुए हैं। 

कृषि के क्षेत्र में, व्यापार के क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र में, राजीतिक क्षेत्र में और सांस्कृतिक क्षेत्र में भारत आज विकसित देशों की होड़ कर रहा है बल्कि कई क्षेत्र में तो उनका मार्गदर्शन - भी कर रहा है। 

आशा की जाती है कि परिवर्तन और विकास की यही दर रही तो 21 वीं शताब्दी में भारत एक महाशक्ति के रूप में उभरेगा।

आणविक भारत:- भारत अब परमाणु शक्ति संपन्न देश है। यद्यपि इसके इरादे शांतिप्रिय हैं तथपि पड़ोसी देशों के गलत इरादों को धूल चटाने में हम सक्षम हैं। 

भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले शत्रुओं को हम ताल ठोककर चेतावनी दे सकते हैं। भारत ने अपनी बलबूते पर इतने कम समय में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। परमाणु विकास की यदि यही प्रगति रही तो भारत आने वाले वर्षों में पूर्णतः आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेगा।

वैज्ञानिक सुविधाओं से युक्त भारत:- आज का समय कंप्यूटर और रोबोट का समय है। भारत में भी इस तकनीक का उत्तरोत्तर विकास होता जा रहा है। कृषि क्षेत्र में, जहाँ सबसे अधिक शरीरिक परिश्रम करना पड़ता था, अब यंत्रों ने स्थान ले लिया है। 

कृषि के लिए फसलों की नई-नई किस्में तैयार की जा रही हैं। देश में हरित क्रांति की लहर छा गई है। देश में पोलियो-मुक्ति अभियान चलाया गया है। आशा की जाती है कि 21वीं शताब्दी पूर्णतः पोलियो-मुक्त होगी। नागरिक स्वस्थ होंगे।

अंधविश्वास-विहीन भारत:- बीसवीं शताब्दी से 21 वीं शताब्दी में जाने को सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि भारतीयों की अंधविश्वासों पर विजय की होगी। भारतीयों पर अंधविश्वासी होने का ठप्पा-सा लगा है। 

परंतु अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों ने, भौतिक सुख-साधनों ने, आध्यात्मिक क्रांति ने अंधविश्वासी लोगों की संख्या में भारी कमी कर दी है। 

भारतीय जन वैज्ञानिक दृष्टि से सोचने लगे हैं। अंधविश्वास भाग्यवादी को जन्म देता है। भाग्यवाद विकास का मार्ग अव३द्ध कर देता है। जैसे-जैसे भाग्यवाद का आवरण हटता जाएगा, विकास का मार्ग प्रशस्त होता जाएगा।

कुछ शंकाएँ:- भारत अपने लक्ष्य-पथ पर तेजी के साथ बढ़ रहा है। यह विकसित देशों की सहन-शक्ति से बाहर है। पड़ोसी देशों से भी भारत को लगातार खतरा रहा है। 

विकसित देशों द्वारा भारत पर समय-समय पर प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण से ईर्ष्यालु देशों को आपत्तियाँ हुईं। 

उन्होंने अनेक प्रतिबंध भी लगाए परंतु सबल व्यक्तियों की सबल सरकार के चलते सभी रो-धोकर बैठ गए। भारतीय संस्कृति और सभ्यता का विश्व में दबदबा भी इतना है कि सभी इसका आदर करते हैं। फिर भी भारतीयों में इतनी सामर्थ्य है कि कोई भी विपत्ति आए, वे उसका सीना तानकर सामना करने को तैयार हैं।

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