प्रदूषण क्या है निबंध लिखिए? | पर्यावरण निबंध कैसे लिखें?

प्रदूषण क्या है निबंध लिखिए? | पर्यावरण निबंध कैसे लिखें?

प्रदूषण क्या है निबंध लिखिए? | पर्यावरण निबंध कैसे लिखें?:- "Pollution", एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई नफरत करता है। Pollution किसी को अच्छा नहीं लगता, फिर आता कहाँ से है? इसके लिए इंसानों के अलावा कोई और जिम्मेदार नहीं है। यह मनुष्य और उनकी गतिविधियाँ हैं, जो पर्यावरण Pollution में योगदान करती हैं। हम अपने घर की सफाई करना पसंद करते हैं लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं वह हमारा घर भी है। बढ़ते Pollution का असर इंसानों के साथ-साथ सभी जीवों पर पड़ेगा।

प्रदूषण क्या है 100 शब्दों में समझाइए?

पर्यावरण में दूषित पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में उत्पन्न होने वाले दोष को प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण पर्यावरण और जानवरों को नुकसान पहुंचाता है। 

प्रदूषण का अर्थ है - 'वायु, जल, मिट्टी आदि का अवांछित पदार्थों से संदूषण, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव जीवों पर पड़ता है और अन्य अप्रत्यक्ष प्रभाव पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। यह वर्तमान समय में पर्यावरण के क्षरण के मुख्य कारणों में से एक है।

प्रदूषण हमारे ग्रह को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों में से एक है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर लंबे समय से चर्चा हुई है, जिसके हानिकारक प्रभाव 21वीं सदी में बड़े पैमाने पर महसूस किए जा रहे हैं।

हालाँकि विभिन्न देशों की सरकारों ने इन प्रभावों को रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, फिर भी अभी एक लंबा रास्ता तय करना है।

इससे कई प्राकृतिक प्रक्रियाएं बाधित होती हैं। इतना ही नहीं, आज कई वनस्पतियां और जीव-जंतु या तो विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने के कगार पर हैं।

प्रदूषण की मात्रा में तेजी से वृद्धि के कारण जानवर न केवल अपना घर बल्कि रहने की प्रकृति भी तेजी से खो रहे हैं। प्रदूषण ने दुनिया भर के कई प्रमुख शहरों को प्रभावित किया है।

इनमें से अधिकांश प्रदूषित शहर भारत में ही स्थित हैं। दुनिया के कुछ सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली, कानपुर, बामेंडा, मॉस्को, हेज़, चेरनोबिल और बीजिंग शामिल हैं।

हालांकि इन शहरों ने प्रदूषण को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, फिर भी उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है। इन स्थानों की वायु गुणवत्ता खराब है और भूमि और जल प्रदूषण के मामले भी बढ़ रहे हैं।

अब समय आ गया है कि वर्तमान प्रशासन इन शहरों में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करे और उसे लागू करे।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

प्रस्तावना : पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ क्या है?

विज्ञान के इस युग में मनुष्य को जहां कुछ वरदान मिले हैं वहीं कुछ श्राप भी मिले हैं। प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप है जो विज्ञान की कोख से पैदा हुआ है और जिसे झेलने के लिए ज्यादातर लोग मजबूर हैं।

पर्यावरण दूषित कैसे होता है? | पर्यावरण प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं?

प्रदूषण का अर्थ प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा करना है। न शुद्ध वायु मिल रही है, न शुद्ध जल मिल रहा है, न शुद्ध भोजन मिल रहा है, न शांत वातावरण मिल रहा है। प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं ! प्रमुख प्रदूषण हैं - वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण।

वायु प्रदुषण

यह प्रदूषण महानगरों में अधिक फैला हुआ है। वहां चौबीस घंटे कल-कारखानों का धुआं और मोटर गाड़ियों का काला धुआं इस कदर फैल चुका है कि स्वस्थ हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है. 

मुंबई की महिलाएं जब छत से धुले हुए कपड़े उतारने जाती हैं तो उन्हें उन पर काले कण जमे हुए मिलते हैं। ये कण सांस के साथ मनुष्य के फेफड़ों में चले जाते हैं और असाध्य रोगों को जन्म देते हैं ! यह समस्या वहाँ अधिक होती है जहाँ सघन जनसंख्या हो, वृक्षों का अभाव हो तथा पर्यावरण तंग हो।

जल प्रदूषण

कल कारखानों का दूषित पानी नदियों और नालों में मिल गया और भीषण जल प्रदूषण पैदा कर दिया। बाढ़ के समय कारखानों का दुर्गंधयुक्त पानी सभी नालों में मिल जाता है। इससे कई बीमारियां होती हैं।

ध्वनि प्रदूषण

मनुष्य को रहने के लिए शांत वातावरण की आवश्यकता होती है। लेकिन आजकल कारखानों का शोर, यातायात का शोर, मोटर वाहनों की चीख-पुकार, लाउडस्पीकरों की कान छिदवाने वाली आवाज ने बहरेपन और तनाव को जन्म दे दिया है।

पर्यावरण प्रदूषण से क्या हानि है?

उपर्युक्त प्रदूषण के कारण मनुष्य के स्वस्थ जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया है। मनुष्य खुली हवा में लंबी सांस लेने को भी तरस गया है। गंदे पानी के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती हैं, जो मानव शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियों का कारण बनती हैं।

भोपाल गैस फैक्ट्री से गैस लीक होने से हजारों लोग मारे गए और कई अपंग हो गए। पर्यावरण प्रदूषण के कारण न तो वर्षा समय पर आती है और न ही सर्दी-गर्मी का चक्र ठीक से चलता है। प्रदूषण प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़, ओले आदि का भी कारण है।

प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं? | पर्यावरण प्रदूषण के कारण क्या हैं?

कारखाने, वैज्ञानिक उपकरणों का अत्यधिक उपयोग, रेफ्रिजरेटर, कूलर, एयर कंडीशनिंग, बिजली संयंत्र आदि बढ़ते प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ना भी इसका प्रमुख कारण है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने मौसम के चक्र को बिगाड़ दिया है। घनी आबादी वाले इलाकों में हरियाली नहीं होने से प्रदूषण भी बढ़ा है।

प्रदूषण रोकने के उपाय क्या हैं? | पर्यावरण प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?

विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए तथा हरियाली की मात्रा अधिक होनी चाहिए। सड़कों के किनारे घने पेड़ होने चाहिए। आबादी वाले क्षेत्र खुले, हवादार और हरियाली से भरे होने चाहिए। कल-कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए और उनसे निकलने वाले प्रदूषित मल को नष्ट करने के उपाय करने चाहिए।

पर्यावरण प्रदूषण : प्रदूषण की समस्या 

[भूमिका, प्रदूषण के कारण, प्रदूषण के प्रकार, परिणाम, प्रदूषण दूर करने के उपाय, उपसंहार] 

भूमिका:- 
मनुष्य प्रकृति की सर्वोत्तम सृष्टि है। जब तक यह प्रकृति के कामों में बाधा नहीं डालता, तब तक इसका जीवन स्वाभाविक गति से चलता है। किन्तु, इधर औद्योगिक विकास के लिए इसने प्रकृति से अपना ताल-मेल समाप्त कर लिया है। 

नतीजा यह है कि जितनी ही तेजी से उद्योग बढ़ रहे हैं, प्रकृति में धुआँ, गंदगी और शोर से प्रदूषण उतनी ही तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह खतरे की घंटी है।

आज के युग में यंत्रों, मोटरगाड़ियों, रेलों तथा कल-कारखानों पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है। परिणामस्वरूप धुएँ के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ गई है और ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है।
 
गौरतलब है कि 860 किलोमीटर चलने पर एक मोटर जितनी ऑक्सीजन का प्रयोग करता है, उतनी ऑक्सीजन मनुष्य को एक वर्ष के लिए चाहिए।
 
हवाई जहाज, तेलशोधक, चीनी मिट्टी, चमड़ा आदि कारखानों में ईंधन जलने से जो धुआँ होता है, उससे अधिक प्रदूषण होता है। घनी आबादी वाले शहर इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 

टोकियो में तो कार्य पर तैनात सिपाही के लिए जगह-जगह पर ऑक्सीजन के सिलिंडर लगे होते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वह ऑक्सीजन ले सके। इंग्लैंड में चार घंटे में यातायात पुलिस की हालत खराब हो जाती है।

जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि भी प्रदूषण का एक कारण है। ग्राम और नगर फैलते जा रहे हैं, जंगलों तथा पेड़-पौधों का नाश होता जा रहा है। वर्षा नहीं होती, सूखा पड़ता है। साथ ही, कल-कारखानों के शोर के कारण लोगों का मानसिक असंतुलन भी बढ़ता जा रहा है।

प्रदूषण अनेक प्रकार के होते हैं, वायु में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाने से वायु प्रदूषित होती है। इसी प्रकार जल में गन्दगी, कचरा डाल देने, शव बहा देने से जल प्रदूषित होते हैं।
 
मिट्टी में जब कृत्रिम खाद की मात्रा बढ़ जाती है, जो मिट्टी भी प्रदूषित होती है। इतना ही नहीं, वातावरण में अधिक शोर-शराबा होने से ध्वनि भी प्रदूषित होती है।

वायु प्रदूषण का नतीजा है कि मनुष्य बीमारियाँ के चंगुल में फंस जाता है, हृदय और श्वास सम्बन्धी बीमारियों घर कर जाती है। यों वायु प्रदूषण प्रायः सब रोगों का प्रमुख कारण है। 

जल की गन्दगी से मवेशी और मनष्य दोनों प्रभावित होते हैं। दूषित जल से मवेशी तो मरते ही हैं, जलीय कीडे मनष्य को भी जानलेवा बीमारियों के चक्कर में डालते हैं। 

मिट्टी प्रदषित होने से फसल प्रदूषित होती है, जिनके सेवन से मनुष्य बीमार होता है। ध्वनि प्रदूषण से कानों पर बुरा असर होता है।

सच्ची बात तो यह है कि जब तक मनुष्य प्रकृति के साथ तालमेल स्थापित नहीं करता, उसकी प्रगति संभव नहीं है। वास्तविक प्रगति के लिए जरूरी है कि हम मशीनों पर शासन करें, न कि मशीनें हम पर।
 
वनों, जलाशयों और पर्वतों का नाश रोके जाने के साथ ही, यह भी जरूरी है कि विषैली गैस, रसायन तथा जल-मल उत्पन्न करने वाले कारखानों को आबादी से दूर रखा जाए ताकि मनुष्य को जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है, उसमें कमी न आये। 

वन महोत्सवों का आयोजन हो। बगीचे और वन लगाए जाएँ ताकि ऑक्सीजन की मात्रा कम न हो। धूआँ वाली गाड़ियों का प्रचलन कम हो और सी. एन. जी. वाली गाड़ियाँ चल। लाउडस्पीकरों, तेज हॉर्न और कर्कश आवाज वाले यंत्रों पर रोक जरूरी है।

मनुष्य सर्वोपरि है। यदि इसका स्वास्थ्य ही ठीक न रहे तो प्रगति का क्या अर्थ? बीमार मनुष्य जीवन का क्या आनन्द उठाएगा? इसलिए जरूरी है कि प्रदूषण रोका जाए ताकि मनुष्य फले-फूले।

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